अध्याय 4, श्लोक 29
अध्याय 4: Śakrādi Stuti — शक्रादिस्तुतिदेव्युवाच व्रियतां त्रिदशाः सर्वे यदस्मत्तोऽभिवाञ्छितम् ॥
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लिप्यंतरण
devyuvāca vriyatāṃ tridaśāḥ sarve yadasmatto'bhivāñchitam
अर्थ
(देवी बोलीं —) 'हे देवगण! आप सब जो कुछ मुझसे चाहते हों, वह वर माँग लीजिए।'
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 4.29 का अर्थ क्या है?▼
(देवी बोलीं —) 'हे देवगण! आप सब जो कुछ मुझसे चाहते हों, वह वर माँग लीजिए।'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 4 (Śakrādi Stuti — शक्रादि स्तुति) का 29वाँ श्लोक है।