अध्याय 4, श्लोक 28
अध्याय 4: Śakrādi Stuti — शक्रादिस्तुतिभक्त्या समस्तैस्त्रिदशैर्दिव्यैर्धूपैः सुधूपिता । प्राह प्रसादसुमुखी समस्तान् प्रणतान् सुरान् ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
bhaktyā samastaistridaśairdivyairdhūpaiḥ sudhūpitā prāha prasādasumukhī samastān praṇatān surān
अर्थ
समस्त देवताओं द्वारा भक्तिपूर्वक दिव्य धूपों से सुधूपित होकर, प्रसन्न मुख से सब प्रणत देवताओं से बोलीं:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 4.28 का अर्थ क्या है?▼
समस्त देवताओं द्वारा भक्तिपूर्वक दिव्य धूपों से सुधूपित होकर, प्रसन्न मुख से सब प्रणत देवताओं से बोलीं:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 4 (Śakrādi Stuti — शक्रादि स्तुति) का 28वाँ श्लोक है।