अध्याय 4, श्लोक 26
अध्याय 4: Śakrādi Stuti — शक्रादिस्तुतिखड्गशूलगदादीनि यानि चास्त्रानि तेऽम्बिके । करपल्लवसङ्गीनि तैरस्मान्रक्ष सर्वतः ॥
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लिप्यंतरण
khaḍgaśūlagadādīni yāni cāstrāni te'mbike karapallavasaṅgīni tairasmānrakṣa sarvataḥ
अर्थ
हे अम्बिके! आपके पल्लव-समान कोमल हाथों में स्थित जो खड्ग, शूल, गदा आदि अस्त्र हैं, उनसे सब ओर से हमारी रक्षा कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 4.26 का अर्थ क्या है?▼
हे अम्बिके! आपके पल्लव-समान कोमल हाथों में स्थित जो खड्ग, शूल, गदा आदि अस्त्र हैं, उनसे सब ओर से हमारी रक्षा कीजिए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 4 (Śakrādi Stuti — शक्रादि स्तुति) का 26वाँ श्लोक है।