अध्याय 4, श्लोक 25
अध्याय 4: Śakrādi Stuti — शक्रादिस्तुतिसौम्यानि यानि रूपाणि त्रैलोक्ये विचरन्ति ते । यानि चात्यन्तघोराणि तै रक्षास्मांस्तथा भुवम् ॥
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लिप्यंतरण
saumyāni yāni rūpāṇi trailokye vicaranti te yāni cātyantaghorāṇi tai rakṣāsmāṃstathā bhuvam
अर्थ
आपके जो सौम्य रूप तीनों लोकों में विचरते हैं, और जो अत्यंत घोर रूप हैं — उन सबसे हमारी और इस पृथ्वी की रक्षा कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 4.25 का अर्थ क्या है?▼
आपके जो सौम्य रूप तीनों लोकों में विचरते हैं, और जो अत्यंत घोर रूप हैं — उन सबसे हमारी और इस पृथ्वी की रक्षा कीजिए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 4 (Śakrādi Stuti — शक्रादि स्तुति) का 25वाँ श्लोक है।