अध्याय 4, श्लोक 24
अध्याय 4: Śakrādi Stuti — शक्रादिस्तुतिप्राच्यां रक्ष प्रतीच्यां च चण्डिके रक्ष दक्षिणे । भ्रामणेनात्मशूलस्य उत्तरस्यां तथेश्वरि ॥
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लिप्यंतरण
prācyāṃ rakṣa pratīcyāṃ ca caṇḍike rakṣa dakṣiṇe bhrāmaṇenātmaśūlasya uttarasyāṃ tatheśvari
अर्थ
हे चण्डिके! पूर्व और पश्चिम में हमारी रक्षा कीजिए; दक्षिण में रक्षा कीजिए; और हे ईश्वरी! अपने शूल को घुमाकर उत्तर दिशा में भी हमारी रक्षा कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 4.24 का अर्थ क्या है?▼
हे चण्डिके! पूर्व और पश्चिम में हमारी रक्षा कीजिए; दक्षिण में रक्षा कीजिए; और हे ईश्वरी! अपने शूल को घुमाकर उत्तर दिशा में भी हमारी रक्षा कीजिए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 4 (Śakrādi Stuti — शक्रादि स्तुति) का 24वाँ श्लोक है।