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दुर्गा सप्तशती 4.19

अध्याय 4, श्लोक 19

अध्याय 4: Śakrādi Stutiशक्रादिस्तुति

खड्गप्रभानिकरविस्फुरणैस्तथोग्रैः शूलाग्रकान्तिनिवहेन दृशोऽसुराणाम् यन्नागता विलयमंशुमदिन्दुखण्ड- योग्याननं तव विलोकयतां तदेतत्

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लिप्यंतरण

khaḍgaprabhānikaravisphuraṇaistathograiḥ śūlāgrakāntinivahena dṛśo'surāṇām yannāgatā vilayamaṃśumadindukhaṇḍa- yogyānanaṃ tava vilokayatāṃ tadetat

अर्थ

आपके खड्ग की प्रभा के तीव्र स्फुरणों और शूल के अग्रभाग की कांति-राशि से असुरों की आँखें यदि नष्ट नहीं हुईं, तो इसका कारण यही है कि वे शीतल किरणों वाले चन्द्रखण्ड के समान आपके मुख को देख रहे थे।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 4.19 का अर्थ क्या है?
आपके खड्ग की प्रभा के तीव्र स्फुरणों और शूल के अग्रभाग की कांति-राशि से असुरों की आँखें यदि नष्ट नहीं हुईं, तो इसका कारण यही है कि वे शीतल किरणों वाले चन्द्रखण्ड के समान आपके मुख को देख रहे थे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 4 (Śakrādi Stuti — शक्रादि स्तुति) का 19वाँ श्लोक है।