अध्याय 4, श्लोक 16
अध्याय 4: Śakrādi Stuti — शक्रादिस्तुतिदुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि । दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
durge smṛtā harasi bhītimaśeṣajantoḥ svasthaiḥ smṛtā matimatīva śubhāṃ dadāsi dāridryaduḥkhabhayahāriṇi kā tvadanyā sarvopakārakaraṇāya sadārdracittā
अर्थ
हे दुर्गे! स्मरण किए जाने पर आप प्रत्येक प्राणी का भय हर लेती हैं; सुखी जनों द्वारा स्मरण किए जाने पर अत्यंत शुभ बुद्धि प्रदान करती हैं। हे दारिद्र्य, दुःख और भय को हरने वाली! आपके अतिरिक्त और कौन है जिसका चित्त सबके उपकार के लिए सदा आर्द्र (दयालु) रहता है?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 4.16 का अर्थ क्या है?▼
हे दुर्गे! स्मरण किए जाने पर आप प्रत्येक प्राणी का भय हर लेती हैं; सुखी जनों द्वारा स्मरण किए जाने पर अत्यंत शुभ बुद्धि प्रदान करती हैं। हे दारिद्र्य, दुःख और भय को हरने वाली! आपके अतिरिक्त और कौन है जिसका चित्त सबके उपकार के लिए सदा आर्द्र (दयालु) रहता है?
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 4 (Śakrādi Stuti — शक्रादि स्तुति) का 16वाँ श्लोक है।