अध्याय 4, श्लोक 13
अध्याय 4: Śakrādi Stuti — शक्रादिस्तुतिदेवि प्रसीद परमा भवती भवाय सद्यो विनाशयसि कोपवती कुलानि । विज्ञातमेतदधुनैव यदस्तमेत- न्नीतं बलं सुविपुलं महिषासुरस्य ॥
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लिप्यंतरण
devi prasīda paramā bhavatī bhavāya sadyo vināśayasi kopavatī kulāni vijñātametadadhunaiva yadastameta- nnītaṃ balaṃ suvipulaṃ mahiṣāsurasya
अर्थ
हे परमे देवी! हमारे कल्याण के लिए प्रसन्न होइए; क्रुद्ध होने पर आप क्षण भर में (शत्रु-)कुलों का नाश कर देती हैं। यह अभी इसी क्षण ज्ञात हो गया, कि महिषासुर की अत्यंत विशाल सेना नष्ट कर दी गई।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 4.13 का अर्थ क्या है?▼
हे परमे देवी! हमारे कल्याण के लिए प्रसन्न होइए; क्रुद्ध होने पर आप क्षण भर में (शत्रु-)कुलों का नाश कर देती हैं। यह अभी इसी क्षण ज्ञात हो गया, कि महिषासुर की अत्यंत विशाल सेना नष्ट कर दी गई।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 4 (Śakrādi Stuti — शक्रादि स्तुति) का 13वाँ श्लोक है।