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दुर्गा सप्तशती 3.12

अध्याय 3, श्लोक 12

अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadhaमहिषासुरवध

भग्नां शक्तिं निपतितां दृष्ट्वा क्रोधसमन्वितः चिक्षेप चामरः शूलं बाणैस्तदपि साच्छिनत्

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लिप्यंतरण

bhagnāṃ śaktiṃ nipatitāṃ dṛṣṭvā krodhasamanvitaḥ cikṣepa cāmaraḥ śūlaṃ bāṇaistadapi sācchinat

अर्थ

अपनी शक्ति को टूटी और गिरी देखकर क्रोध से भरे चामर ने शूल फेंका; पर देवी ने उसे भी अपने बाणों से काट डाला।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 3.12 का अर्थ क्या है?
अपनी शक्ति को टूटी और गिरी देखकर क्रोध से भरे चामर ने शूल फेंका; पर देवी ने उसे भी अपने बाणों से काट डाला।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 12वाँ श्लोक है।