अध्याय 12, श्लोक 31
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)पश्यतां सर्वदेवानां तत्रैवान्तरधीयत । तेऽपि देवा निरातङ्काः स्वाधिकारान्यथा पुरा ॥
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लिप्यंतरण
paśyatāṃ sarvadevānāṃ tatraivāntaradhīyata te'pi devā nirātaṅkāḥ svādhikārānyathā purā
अर्थ
समस्त देवताओं के देखते-देखते वहीं अन्तर्धान हो गईं। और वे देवता भी निर्भय होकर पहले की भाँति अपने अधिकारों को (पुनः प्राप्त करके) —
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.31 का अर्थ क्या है?▼
समस्त देवताओं के देखते-देखते वहीं अन्तर्धान हो गईं। और वे देवता भी निर्भय होकर पहले की भाँति अपने अधिकारों को (पुनः प्राप्त करके) —
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 31वाँ श्लोक है।