अध्याय 12, श्लोक 24
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)ब्रह्मणा च कृतास्तास्तु प्रयच्छन्तु शुभां मतिम् । अरण्ये प्रान्तरे वापि दावाग्निपरिवारितः ॥
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लिप्यंतरण
brahmaṇā ca kṛtāstāstu prayacchantu śubhāṃ matim araṇye prāntare vāpi dāvāgniparivāritaḥ
अर्थ
और जो ब्रह्मा द्वारा रची गईं — वे (सब) शुभ बुद्धि प्रदान करें। वन या निर्जन प्रान्तर में दावाग्नि से घिरा हुआ,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.24 का अर्थ क्या है?▼
और जो ब्रह्मा द्वारा रची गईं — वे (सब) शुभ बुद्धि प्रदान करें। वन या निर्जन प्रान्तर में दावाग्नि से घिरा हुआ,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 24वाँ श्लोक है।