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दुर्गा सप्तशती 12.22

अध्याय 12, श्लोक 22

अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti)भगवतीवाक्य (फलश्रुति)

रक्षां करोति भूतेभ्यो जन्मनां कीर्तनं मम युद्धेषु चरितं यन्मे दुष्टदैत्यनिबर्हणम्

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लिप्यंतरण

rakṣāṃ karoti bhūtebhyo janmanāṃ kīrtanaṃ mama yuddheṣu caritaṃ yanme duṣṭadaityanibarhaṇam

अर्थ

मेरे प्राकट्यों का कीर्तन (दुष्ट) भूतों से रक्षा करता है। और युद्धों में मेरा जो चरित्र है, जो दुष्ट दैत्यों का संहार करने वाला है —

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 12.22 का अर्थ क्या है?
मेरे प्राकट्यों का कीर्तन (दुष्ट) भूतों से रक्षा करता है। और युद्धों में मेरा जो चरित्र है, जो दुष्ट दैत्यों का संहार करने वाला है —
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 22वाँ श्लोक है।