अध्याय 11, श्लोक 9
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतिसर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
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लिप्यंतरण
sarvamaṅgalamāṅgalye śive sarvārthasādhike śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo'stu te
अर्थ
हे समस्त मंगलों की मांगल्य-स्वरूपा! हे कल्याणी शिवे! हे समस्त प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली! हे शरण्ये त्र्यम्बके गौरी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.9 का अर्थ क्या है?▼
हे समस्त मंगलों की मांगल्य-स्वरूपा! हे कल्याणी शिवे! हे समस्त प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली! हे शरण्ये त्र्यम्बके गौरी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 9वाँ श्लोक है।