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दुर्गा सप्तशती 11.8

अध्याय 11, श्लोक 8

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

कलाकाष्ठादिरूपेण परिणामप्रदायिनि विश्वस्योपरतौ शक्ते नारायणि नमोऽस्तु ते

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लिप्यंतरण

kalākāṣṭhādirūpeṇa pariṇāmapradāyini viśvasyoparatau śakte nārāyaṇi namo'stu te

अर्थ

हे कला, काष्ठा आदि (काल के) रूप से (सब) परिणाम प्रदान करने वाली! हे विश्व के संहार में समर्थ शक्ति! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.8 का अर्थ क्या है?
हे कला, काष्ठा आदि (काल के) रूप से (सब) परिणाम प्रदान करने वाली! हे विश्व के संहार में समर्थ शक्ति! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 8वाँ श्लोक है।