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दुर्गा सप्तशती 11.7

अध्याय 11, श्लोक 7

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हृदि संस्थिते स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते

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लिप्यंतरण

sarvasya buddhirūpeṇa janasya hṛdi saṃsthite svargāpavargade devi nārāyaṇi namo'stu te

अर्थ

हे समस्त जनों के हृदय में बुद्धि रूप से स्थित! हे स्वर्ग और मोक्ष देने वाली देवी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.7 का अर्थ क्या है?
हे समस्त जनों के हृदय में बुद्धि रूप से स्थित! हे स्वर्ग और मोक्ष देने वाली देवी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 7वाँ श्लोक है।