अध्याय 11, श्लोक 6
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतिसर्वभूता यदा देवी भुक्तिमुक्तिप्रदायिनी । त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः ॥
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लिप्यंतरण
sarvabhūtā yadā devī bhuktimuktipradāyinī tvaṃ stutā stutaye kā vā bhavantu paramoktayaḥ
अर्थ
जब आप — समस्त भूत-स्वरूपा, भोग और मोक्ष देने वाली देवी — की स्तुति की जाए, तब स्तुति के लिए कौन-सी श्रेष्ठ उक्तियाँ पर्याप्त हो सकती हैं?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.6 का अर्थ क्या है?▼
जब आप — समस्त भूत-स्वरूपा, भोग और मोक्ष देने वाली देवी — की स्तुति की जाए, तब स्तुति के लिए कौन-सी श्रेष्ठ उक्तियाँ पर्याप्त हो सकती हैं?
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 6वाँ श्लोक है।