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दुर्गा सप्तशती 11.10

अध्याय 11, श्लोक 10

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते

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लिप्यंतरण

sṛṣṭisthitivināśānāṃ śaktibhūte sanātani guṇāśraye guṇamaye nārāyaṇi namo'stu te

अर्थ

हे सृष्टि, स्थिति और संहार की शक्ति-स्वरूपा सनातनी! हे गुणों की आश्रय और गुणमयी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.10 का अर्थ क्या है?
हे सृष्टि, स्थिति और संहार की शक्ति-स्वरूपा सनातनी! हे गुणों की आश्रय और गुणमयी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 10वाँ श्लोक है।