अध्याय 11, श्लोक 11
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतिशरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
śaraṇāgatadīnārtaparitrāṇaparāyaṇe sarvasyārtihare devi nārāyaṇi namo'stu te
अर्थ
हे शरणागत, दीन और आर्त जनों की रक्षा में तत्पर! हे सबकी पीड़ा हरने वाली देवी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.11 का अर्थ क्या है?▼
हे शरणागत, दीन और आर्त जनों की रक्षा में तत्पर! हे सबकी पीड़ा हरने वाली देवी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 11वाँ श्लोक है।