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दुर्गा सप्तशती 11.12

अध्याय 11, श्लोक 12

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

हंसयुक्तविमानस्थे ब्रह्माणीरूपधारिणि कौशाम्भःक्षरिके देवि नारायणि नमोऽस्तु ते

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लिप्यंतरण

haṃsayuktavimānasthe brahmāṇīrūpadhāriṇi kauśāmbhaḥkṣarike devi nārāyaṇi namo'stu te

अर्थ

हे हंसयुक्त विमान पर विराजमान, ब्राह्मणी रूप धारण करने वाली, कुश-जल से अभिषेक करने वाली देवी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.12 का अर्थ क्या है?
हे हंसयुक्त विमान पर विराजमान, ब्राह्मणी रूप धारण करने वाली, कुश-जल से अभिषेक करने वाली देवी! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 12वाँ श्लोक है।