अध्याय 11, श्लोक 13
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतित्रिशूलचन्द्राहिधरे महावृषभवाहिनि । माहेश्वरीस्वरूपेण नारायणि नमोऽस्तुते ॥
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लिप्यंतरण
triśūlacandrāhidhare mahāvṛṣabhavāhini māheśvarīsvarūpeṇa nārāyaṇi namo'stute
अर्थ
हे त्रिशूल, चन्द्र और सर्प धारण करने वाली, महान् वृषभ पर सवार माहेश्वरी रूप वाली! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.13 का अर्थ क्या है?▼
हे त्रिशूल, चन्द्र और सर्प धारण करने वाली, महान् वृषभ पर सवार माहेश्वरी रूप वाली! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 13वाँ श्लोक है।