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दुर्गा सप्तशती 11.14

अध्याय 11, श्लोक 14

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

मयूरकुक्कुटवृते महाशक्तिधरेऽनघे कौमारीरूपसंस्थाने नारायणि नमोऽस्तु ते

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लिप्यंतरण

mayūrakukkuṭavṛte mahāśaktidhare'naghe kaumārīrūpasaṃsthāne nārāyaṇi namo'stu te

अर्थ

हे मयूर और कुक्कुट से घिरी, महाशक्ति धारण करने वाली, निष्पाप कौमारी रूप में स्थित! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.14 का अर्थ क्या है?
हे मयूर और कुक्कुट से घिरी, महाशक्ति धारण करने वाली, निष्पाप कौमारी रूप में स्थित! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 14वाँ श्लोक है।