अध्याय 11, श्लोक 15
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतिशङ्खचक्रगदाशार्ङ्गगृहीतपरमायुधे । प्रसीद वैष्णवीरूपे नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
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लिप्यंतरण
śaṅkhacakragadāśārṅgagṛhītaparamāyudhe prasīda vaiṣṇavīrūpe nārāyaṇi namo'stu te
अर्थ
हे शंख, चक्र, गदा और शार्ङ्ग रूप परम आयुध धारण करने वाली! प्रसन्न होइए, हे वैष्णवी रूप वाली! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.15 का अर्थ क्या है?▼
हे शंख, चक्र, गदा और शार्ङ्ग रूप परम आयुध धारण करने वाली! प्रसन्न होइए, हे वैष्णवी रूप वाली! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 15वाँ श्लोक है।