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दुर्गा सप्तशती 11.16

अध्याय 11, श्लोक 16

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

गृहीतोग्रमहाचक्रे दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे वराहरूपिणि शिवे नारायणि नमोऽस्तु ते

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लिप्यंतरण

gṛhītogramahācakre daṃṣṭroddhṛtavasundhare varāharūpiṇi śive nārāyaṇi namo'stu te

अर्थ

हे उग्र महाचक्र धारण करने वाली, दाढ़ से पृथ्वी को उठाने वाली, कल्याणी वराह (वाराही) रूप वाली! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.16 का अर्थ क्या है?
हे उग्र महाचक्र धारण करने वाली, दाढ़ से पृथ्वी को उठाने वाली, कल्याणी वराह (वाराही) रूप वाली! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 16वाँ श्लोक है।