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दुर्गा सप्तशती 11.17

अध्याय 11, श्लोक 17

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

नृसिंहरूपेणोग्रेण हन्तुं दैत्यान् कृतोद्यमे त्रैलोक्यत्राणसहिते नारायणि नमोऽस्तु ते

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लिप्यंतरण

nṛsiṃharūpeṇogreṇa hantuṃ daityān kṛtodyame trailokyatrāṇasahite nārāyaṇi namo'stu te

अर्थ

हे उग्र नृसिंह रूप से दैत्यों के वध में उद्यत, त्रैलोक्य की रक्षा से युक्त! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.17 का अर्थ क्या है?
हे उग्र नृसिंह रूप से दैत्यों के वध में उद्यत, त्रैलोक्य की रक्षा से युक्त! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 17वाँ श्लोक है।