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दुर्गा सप्तशती 11.18

अध्याय 11, श्लोक 18

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

किरीटिनि महावज्रे सहस्रनयनोज्ज्वले वृत्रप्राणहरे चैन्द्रि नारायणि नमोऽस्तु ते

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लिप्यंतरण

kirīṭini mahāvajre sahasranayanojjvale vṛtraprāṇahare caindri nārāyaṇi namo'stu te

अर्थ

हे मुकुट धारण करने वाली, महान् वज्र धारण करने वाली, सहस्र नेत्रों से उज्ज्वल, वृत्र के प्राण हरने वाली ऐन्द्री! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.18 का अर्थ क्या है?
हे मुकुट धारण करने वाली, महान् वज्र धारण करने वाली, सहस्र नेत्रों से उज्ज्वल, वृत्र के प्राण हरने वाली ऐन्द्री! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 18वाँ श्लोक है।