अध्याय 11, श्लोक 47
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतिरक्षांसि भक्षयिष्यामि मुनीनां त्राणकारणात् । तदा मां मुनयः सर्वे स्तोष्यन्त्यानम्रमूर्तयः ॥
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लिप्यंतरण
rakṣāṃsi bhakṣayiṣyāmi munīnāṃ trāṇakāraṇāt tadā māṃ munayaḥ sarve stoṣyantyānamramūrtayaḥ
अर्थ
मुनियों की रक्षा के लिए राक्षसों का भक्षण करूँगी — तब समस्त मुनि नम्र शरीर से मेरी स्तुति करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.47 का अर्थ क्या है?▼
मुनियों की रक्षा के लिए राक्षसों का भक्षण करूँगी — तब समस्त मुनि नम्र शरीर से मेरी स्तुति करेंगे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 47वाँ श्लोक है।