अध्याय 11, श्लोक 44
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतिततोऽहमखिलं लोकमात्मदेहसमुद्भवैः । भरिष्यामि सुराः शाकैरावृष्टेः प्राणधारकैः ॥
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लिप्यंतरण
tato'hamakhilaṃ lokamātmadehasamudbhavaiḥ bhariṣyāmi surāḥ śākairāvṛṣṭeḥ prāṇadhārakaiḥ
अर्थ
तब हे देवगण! मैं अपने ही शरीर से उत्पन्न, प्राणधारण कराने वाली शाक-सब्जियों से वर्षा होने तक समस्त लोक का पालन करूँगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.44 का अर्थ क्या है?▼
तब हे देवगण! मैं अपने ही शरीर से उत्पन्न, प्राणधारण कराने वाली शाक-सब्जियों से वर्षा होने तक समस्त लोक का पालन करूँगी।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 44वाँ श्लोक है।