अध्याय 11, श्लोक 43
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतिततः शतेन नेत्राणां निरीक्षिष्याम्यहं मुनीन् । कीर्तयिष्यन्ति मनुजाः शताक्षीमिति मां ततः ॥
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लिप्यंतरण
tataḥ śatena netrāṇāṃ nirīkṣiṣyāmyahaṃ munīn kīrtayiṣyanti manujāḥ śatākṣīmiti māṃ tataḥ
अर्थ
तब मैं सौ नेत्रों से मुनियों को देखूँगी; इसीलिए मनुष्य मुझे 'शताक्षी' कहकर कीर्तन करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.43 का अर्थ क्या है?▼
तब मैं सौ नेत्रों से मुनियों को देखूँगी; इसीलिए मनुष्य मुझे 'शताक्षी' कहकर कीर्तन करेंगे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 43वाँ श्लोक है।