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दुर्गा सप्तशती 11.42

अध्याय 11, श्लोक 42

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

भूयश्च शतवार्षिक्यामनावृष्ट्यामनम्भसि मुनिभिः संस्मृता भूमौ सम्भविष्याम्ययोनिजा

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लिप्यंतरण

bhūyaśca śatavārṣikyāmanāvṛṣṭyāmanambhasi munibhiḥ saṃsmṛtā bhūmau sambhaviṣyāmyayonijā

अर्थ

और फिर जब सौ वर्ष तक पृथ्वी पर अनावृष्टि (जल-रहित सूखा) होगी, तब मुनियों द्वारा स्मरण की जाकर मैं अयोनिजा रूप में पृथ्वी पर प्रकट होऊँगी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.42 का अर्थ क्या है?
और फिर जब सौ वर्ष तक पृथ्वी पर अनावृष्टि (जल-रहित सूखा) होगी, तब मुनियों द्वारा स्मरण की जाकर मैं अयोनिजा रूप में पृथ्वी पर प्रकट होऊँगी।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 42वाँ श्लोक है।