अध्याय 11, श्लोक 41
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतिततो मां देवताः स्वर्गे मर्त्यलोके च मानवाः । स्तुवन्तो व्याहरिष्यन्ति सततं रक्तदन्तिकाम् ॥
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लिप्यंतरण
tato māṃ devatāḥ svarge martyaloke ca mānavāḥ stuvanto vyāhariṣyanti satataṃ raktadantikām
अर्थ
तब स्वर्ग में देवता और मर्त्यलोक में मनुष्य मेरी स्तुति करते हुए मुझे सदा 'रक्तदन्तिका' कहकर पुकारेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.41 का अर्थ क्या है?▼
तब स्वर्ग में देवता और मर्त्यलोक में मनुष्य मेरी स्तुति करते हुए मुझे सदा 'रक्तदन्तिका' कहकर पुकारेंगे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 41वाँ श्लोक है।