Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 11.40

अध्याय 11, श्लोक 40

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

भक्षयन्त्याश्च तानुग्रान् वैप्रचित्तान् महासुरान् रक्ता दन्ता भविष्यन्ति दाडिमीकुसुमोपमाः

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

bhakṣayantyāśca tānugrān vaipracittān mahāsurān raktā dantā bhaviṣyanti dāḍimīkusumopamāḥ

अर्थ

और उन उग्र वैप्रचित्त महान् असुरों को खाते समय मेरे दाँत अनार के फूलों के समान लाल हो जाएँगे।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.40 का अर्थ क्या है?
और उन उग्र वैप्रचित्त महान् असुरों को खाते समय मेरे दाँत अनार के फूलों के समान लाल हो जाएँगे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 40वाँ श्लोक है।