अध्याय 11, श्लोक 39
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतिपुनरप्यतिरौद्रेण रूपेण पृथिवीतले । अवतीर्य हनिष्यामि वैप्रचित्तांश्च दानवान् ॥
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लिप्यंतरण
punarapyatiraudreṇa rūpeṇa pṛthivītale avatīrya haniṣyāmi vaipracittāṃśca dānavān
अर्थ
और फिर अत्यन्त रौद्र रूप से पृथ्वीतल पर अवतीर्ण होकर मैं वैप्रचित्त दानवों का वध करूँगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.39 का अर्थ क्या है?▼
और फिर अत्यन्त रौद्र रूप से पृथ्वीतल पर अवतीर्ण होकर मैं वैप्रचित्त दानवों का वध करूँगी।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 39वाँ श्लोक है।