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दुर्गा सप्तशती 11.38

अध्याय 11, श्लोक 38

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

नन्दगोपगृहे जाता यशोदागर्भसम्भवा ततस्तौ नाशयिष्यामि विन्ध्याचलनिवासिनी

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लिप्यंतरण

nandagopagṛhe jātā yaśodāgarbhasambhavā tatastau nāśayiṣyāmi vindhyācalanivāsinī

अर्थ

तब नन्द गोप के घर में, यशोदा के गर्भ से उत्पन्न होकर, और विन्ध्याचल पर निवास करती हुई मैं उन दोनों का नाश करूँगी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.38 का अर्थ क्या है?
तब नन्द गोप के घर में, यशोदा के गर्भ से उत्पन्न होकर, और विन्ध्याचल पर निवास करती हुई मैं उन दोनों का नाश करूँगी।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 38वाँ श्लोक है।