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दुर्गा सप्तशती 11.37

अध्याय 11, श्लोक 37

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

देव्युवाच वैवस्वतेऽन्तरे प्राप्ते अष्टाविंशतिमे युगे शुम्भो निशुम्भश्चैवान्यावुत्पत्स्येते महासुरौ

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लिप्यंतरण

devyuvāca vaivasvate'ntare prāpte aṣṭāviṃśatime yuge śumbho niśumbhaścaivānyāvutpatsyete mahāsurau

अर्थ

(देवी बोलीं —) 'वैवस्वत मन्वन्तर में अट्ठाईसवें युग के आने पर शुम्भ और निशुम्भ नामक दो अन्य महान् असुर उत्पन्न होंगे।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.37 का अर्थ क्या है?
(देवी बोलीं —) 'वैवस्वत मन्वन्तर में अट्ठाईसवें युग के आने पर शुम्भ और निशुम्भ नामक दो अन्य महान् असुर उत्पन्न होंगे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 37वाँ श्लोक है।