अध्याय 11, श्लोक 36
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतिदेवा ऊचुः सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि । एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम् ॥
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लिप्यंतरण
devā ūcuḥ sarvābādhāpraśamanaṃ trailokyasyākhileśvari evameva tvayā kāryamasmadvairivināśanam
अर्थ
(देवता बोले —) 'हे अखिलेश्वरी! त्रैलोक्य की समस्त बाधाओं का शमन और हमारे शत्रुओं का विनाश — यही आप (सदा) करती रहें।'
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.36 का अर्थ क्या है?▼
(देवता बोले —) 'हे अखिलेश्वरी! त्रैलोक्य की समस्त बाधाओं का शमन और हमारे शत्रुओं का विनाश — यही आप (सदा) करती रहें।'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 36वाँ श्लोक है।