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दुर्गा सप्तशती 11.28

अध्याय 11, श्लोक 28

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् त्वामाश्रितानां विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति

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लिप्यंतरण

rogānaśeṣānapahaṃsi tuṣṭā ruṣṭā tu kāmān sakalānabhīṣṭān tvāmāśritānāṃ na vipannarāṇāṃ tvāmāśritā hyāśrayatāṃ prayānti

अर्थ

प्रसन्न होने पर आप समस्त रोगों का नाश करती हैं; पर रुष्ट होने पर (दुष्टों के) समस्त अभीष्ट कामनाओं का। जो आपकी शरण में आ गए, उन मनुष्यों पर कोई विपत्ति नहीं आती; बल्कि जो आपकी शरण में हैं, वे (औरों के लिए) आश्रय बन जाते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.28 का अर्थ क्या है?
प्रसन्न होने पर आप समस्त रोगों का नाश करती हैं; पर रुष्ट होने पर (दुष्टों के) समस्त अभीष्ट कामनाओं का। जो आपकी शरण में आ गए, उन मनुष्यों पर कोई विपत्ति नहीं आती; बल्कि जो आपकी शरण में हैं, वे (औरों के लिए) आश्रय बन जाते हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 28वाँ श्लोक है।