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दुर्गा सप्तशती 11.27

अध्याय 11, श्लोक 27

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

असुरासृग्वसापङ्कचर्चितस्ते करोज्ज्वलः शुभाय खड्गो भवतु चण्डिके त्वां नता वयम्

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लिप्यंतरण

asurāsṛgvasāpaṅkacarcitaste karojjvalaḥ śubhāya khaḍgo bhavatu caṇḍike tvāṃ natā vayam

अर्थ

असुरों के रक्त और चर्बी के पंक से लिपा हुआ, आपके हाथ में उज्ज्वल वह खड्ग हमारे कल्याण के लिए हो, हे चण्डिके! हम आपको प्रणाम करते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.27 का अर्थ क्या है?
असुरों के रक्त और चर्बी के पंक से लिपा हुआ, आपके हाथ में उज्ज्वल वह खड्ग हमारे कल्याण के लिए हो, हे चण्डिके! हम आपको प्रणाम करते हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 27वाँ श्लोक है।