अध्याय 11, श्लोक 26
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतिहिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत् । सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥
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लिप्यंतरण
hinasti daityatejāṃsi svanenāpūrya yā jagat sā ghaṇṭā pātu no devi pāpebhyo naḥ sutāniva
अर्थ
जो अपने नाद से जगत् को भरकर दैत्यों के तेज का नाश करता है, वह आपका घण्टा हमें पापों से वैसे ही बचाए, हे देवी! जैसे माता अपनी संतान की रक्षा करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.26 का अर्थ क्या है?▼
जो अपने नाद से जगत् को भरकर दैत्यों के तेज का नाश करता है, वह आपका घण्टा हमें पापों से वैसे ही बचाए, हे देवी! जैसे माता अपनी संतान की रक्षा करती है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 26वाँ श्लोक है।