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दुर्गा सप्तशती 11.25

अध्याय 11, श्लोक 25

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

ज्वालाकरालमत्युग्रमशेषासुरसूदनम् त्रिशूलं पातु नो भीतेर्भद्रकालि नमोऽस्तु ते

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लिप्यंतरण

jvālākarālamatyugramaśeṣāsurasūdanam triśūlaṃ pātu no bhīterbhadrakāli namo'stu te

अर्थ

ज्वालाओं से विकराल, अत्यन्त उग्र, समस्त असुरों का संहार करने वाला आपका त्रिशूल हमें भय से बचाए; हे भद्रकालि! आपको नमस्कार है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.25 का अर्थ क्या है?
ज्वालाओं से विकराल, अत्यन्त उग्र, समस्त असुरों का संहार करने वाला आपका त्रिशूल हमें भय से बचाए; हे भद्रकालि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 25वाँ श्लोक है।