अध्याय 11, श्लोक 22
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतिमेधे सरस्वति वरे भूति बाभ्रवि तामसि । नियते त्वं प्रसीदेशे नारायणि नमोऽस्तुते ॥
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लिप्यंतरण
medhe sarasvati vare bhūti bābhravi tāmasi niyate tvaṃ prasīdeśe nārāyaṇi namo'stute
अर्थ
हे मेधे! हे सरस्वति! हे वरे! हे भूति! हे बाभ्रवि! हे तामसि! हे नियते! प्रसन्न होइए, हे ईशे! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.22 का अर्थ क्या है?▼
हे मेधे! हे सरस्वति! हे वरे! हे भूति! हे बाभ्रवि! हे तामसि! हे नियते! प्रसन्न होइए, हे ईशे! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 22वाँ श्लोक है।