अध्याय 11, श्लोक 21
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतिलक्ष्मि लज्जे महाविद्ये श्रद्धे पुष्टि स्वधे ध्रुवे । महारात्रि महामाये नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
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लिप्यंतरण
lakṣmi lajje mahāvidye śraddhe puṣṭi svadhe dhruve mahārātri mahāmāye nārāyaṇi namo'stu te
अर्थ
हे लक्ष्मी! हे लज्जे! हे महाविद्ये! हे श्रद्धे! हे पुष्टि! हे स्वधे! हे ध्रुवे! हे महारात्रि! हे महामाये! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.21 का अर्थ क्या है?▼
हे लक्ष्मी! हे लज्जे! हे महाविद्ये! हे श्रद्धे! हे पुष्टि! हे स्वधे! हे ध्रुवे! हे महारात्रि! हे महामाये! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 21वाँ श्लोक है।