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दुर्गा सप्तशती 11.20

अध्याय 11, श्लोक 20

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

दंष्ट्राकरालवदने शिरोमालाविभूषणे चामुण्डे मुण्डमथने नारायणि नमोऽस्तु ते

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लिप्यंतरण

daṃṣṭrākarālavadane śiromālāvibhūṣaṇe cāmuṇḍe muṇḍamathane nārāyaṇi namo'stu te

अर्थ

हे दाढ़ों से विकराल मुख वाली, मुण्डमाला से विभूषित, मुण्ड का मर्दन करने वाली चामुण्डे! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.20 का अर्थ क्या है?
हे दाढ़ों से विकराल मुख वाली, मुण्डमाला से विभूषित, मुण्ड का मर्दन करने वाली चामुण्डे! हे नारायणि! आपको नमस्कार है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 20वाँ श्लोक है।