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दुर्गा सप्तशती 10.1

अध्याय 10, श्लोक 1

अध्याय 10: Śumbha Vadhaशुम्भवध

ऋषिरुवाच निशुम्भं निहतं दृष्ट्वा भ्रातरं प्राणसम्मितम् हन्यमानं बलं चैव शुम्भः क्रुद्धोऽब्रवीद्वचः

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लिप्यंतरण

oṃ ṛṣiruvāca niśumbhaṃ nihataṃ dṛṣṭvā bhrātaraṃ prāṇasammitam hanyamānaṃ balaṃ caiva śumbhaḥ kruddho'bravīdvacaḥ

अर्थ

(ॐ। ऋषि बोले —) अपने प्राणों के समान प्रिय भाई निशुम्भ को मारा गया और सेना को नष्ट होते देख क्रुद्ध शुम्भ ने ये वचन कहे:

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 10.1 का अर्थ क्या है?
(ॐ। ऋषि बोले —) अपने प्राणों के समान प्रिय भाई निशुम्भ को मारा गया और सेना को नष्ट होते देख क्रुद्ध शुम्भ ने ये वचन कहे:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 1वाँ श्लोक है।