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दुर्गा सप्तशती 1.9

अध्याय 1, श्लोक 9

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

तत्राश्रममद्राक्षीद्द्विजवर्यस्य मेधसः प्रशान्तश्वापदाकीर्णं मुनिशिष्योपशोभितम्

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लिप्यंतरण

sa tatrāśramamadrākṣīddvijavaryasya medhasaḥ praśāntaśvāpadākīrṇaṃ muniśiṣyopaśobhitam

अर्थ

वहाँ उन्होंने द्विजश्रेष्ठ महर्षि मेधा का आश्रम देखा, जो शांत, शांत हो गए वन्य पशुओं से युक्त और मुनि के शिष्यों से सुशोभित था।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.9 का अर्थ क्या है?
वहाँ उन्होंने द्विजश्रेष्ठ महर्षि मेधा का आश्रम देखा, जो शांत, शांत हो गए वन्य पशुओं से युक्त और मुनि के शिष्यों से सुशोभित था।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 9वाँ श्लोक है।