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दुर्गा सप्तशती 1.8

अध्याय 1, श्लोक 8

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

ततो मृगयाव्याजेन हृतस्वाम्यः भूपतिः एकाकी हयमारुह्य जगाम गहनं वनम्

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लिप्यंतरण

tato mṛgayāvyājena hṛtasvāmyaḥ sa bhūpatiḥ ekākī hayamāruhya jagāma gahanaṃ vanam

अर्थ

तत्पश्चात् राज्य से वंचित वे राजा शिकार के बहाने अकेले ही घोड़े पर चढ़कर घने वन में चले गए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.8 का अर्थ क्या है?
तत्पश्चात् राज्य से वंचित वे राजा शिकार के बहाने अकेले ही घोड़े पर चढ़कर घने वन में चले गए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 8वाँ श्लोक है।