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दुर्गा सप्तशती 1.7

अध्याय 1, श्लोक 7

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

अमात्यैर्बलिभिर्दुष्टैर्दुर्बलस्य दुरात्मभिः कोशो बलं चापहृतं तत्रापि स्वपुरे ततः

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लिप्यंतरण

amātyairbalibhirduṣṭairdurbalasya durātmabhiḥ kośo balaṃ cāpahṛtaṃ tatrāpi svapure tataḥ

अर्थ

अपने ही नगर में उस दुर्बल हुए राजा का कोश और सेना उसके बलवान्, दुष्ट और दुरात्मा मंत्रियों ने हड़प लिया।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.7 का अर्थ क्या है?
अपने ही नगर में उस दुर्बल हुए राजा का कोश और सेना उसके बलवान्, दुष्ट और दुरात्मा मंत्रियों ने हड़प लिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 7वाँ श्लोक है।