अध्याय 1, श्लोक 10
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधतस्थौ कञ्चित्स कालं च मुनिना तेन सत्कृतः । इतश्चेतश्च विचरंस्तस्मिन् मुनिवराश्रमे ॥
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लिप्यंतरण
tasthau kañcitsa kālaṃ ca muninā tena satkṛtaḥ itaścetaśca vicaraṃstasmin munivarāśrame
अर्थ
मुनि से सत्कार पाकर वे कुछ काल वहाँ रहे, उस श्रेष्ठ मुनि के आश्रम में इधर-उधर विचरते हुए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.10 का अर्थ क्या है?▼
मुनि से सत्कार पाकर वे कुछ काल वहाँ रहे, उस श्रेष्ठ मुनि के आश्रम में इधर-उधर विचरते हुए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 10वाँ श्लोक है।