Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 1.11

अध्याय 1, श्लोक 11

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

सोऽचिन्तयत्तदा तत्र ममत्वाकृष्टमानसः मत्पूर्वैः पालितं पूर्वं मया हीनं पुरं हि तत्

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

so'cintayattadā tatra mamatvākṛṣṭamānasaḥ matpūrvaiḥ pālitaṃ pūrvaṃ mayā hīnaṃ puraṃ hi tat

अर्थ

वहाँ ममता से आकृष्ट मन वाले वे तब सोचने लगे — 'जो नगर पहले मेरे पूर्वजों द्वारा पालित था और अब मुझसे छूट गया है,

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.11 का अर्थ क्या है?
वहाँ ममता से आकृष्ट मन वाले वे तब सोचने लगे — 'जो नगर पहले मेरे पूर्वजों द्वारा पालित था और अब मुझसे छूट गया है,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 11वाँ श्लोक है।