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दुर्गा सप्तशती 1.12

अध्याय 1, श्लोक 12

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

मद्भृत्यैस्तैरसद्वृत्तैर्धर्मतः पाल्यते वा जाने प्रधानो मे शूरो हस्ती सदामदः

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लिप्यंतरण

madbhṛtyaistairasadvṛttairdharmataḥ pālyate na vā na jāne sa pradhāno me śūro hastī sadāmadaḥ

अर्थ

मेरे उन दुराचारी सेवकों द्वारा धर्मपूर्वक उसका पालन हो रहा है या नहीं? मैं नहीं जानता कि मेरा वह प्रधान शूरवीर सदा मदमत्त हाथी,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.12 का अर्थ क्या है?
मेरे उन दुराचारी सेवकों द्वारा धर्मपूर्वक उसका पालन हो रहा है या नहीं? मैं नहीं जानता कि मेरा वह प्रधान शूरवीर सदा मदमत्त हाथी,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 12वाँ श्लोक है।