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दुर्गा सप्तशती 1.13

अध्याय 1, श्लोक 13

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

मम वैरिवशं यातः कान् भोगानुपलप्स्यते ये ममानुगता नित्यं प्रसादधनभोजनैः

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लिप्यंतरण

mama vairivaśaṃ yātaḥ kān bhogānupalapsyate ye mamānugatā nityaṃ prasādadhanabhojanaiḥ

अर्थ

जो अब मेरे शत्रुओं के वश में चला गया है, उसे क्या सुख मिलेंगे? जो लोग सदा मेरे अनुग्रह, धन और भोजन से मेरे पीछे चलते थे,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.13 का अर्थ क्या है?
जो अब मेरे शत्रुओं के वश में चला गया है, उसे क्या सुख मिलेंगे? जो लोग सदा मेरे अनुग्रह, धन और भोजन से मेरे पीछे चलते थे,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 13वाँ श्लोक है।